Wednesday, June 22, 2011

धर्म कमल

धर्म की परिभाषाओं को लेकर समूची दुनिया में खूब वाद विवाद हुए हैं। बड़े बड़े विद्धानों ने धर्म क्‍या है, पर खूब व्‍याख्‍यान दिए हैं। अपने आप को दूसरे विद्धानों से श्रेष्‍ठ इस मायने में साबित किया कि वे जो बता रहे हैं वही धर्म की असली परिभाषा है बाकी सब नकली एवं बकवास। लेकिन मेरी राय में धर्म क्‍या है, के लिए इस कविता से श्रेष्‍ठ कुछ नहीं हो सकता।

कमल की यह खूबी है
कि कीच से जुड़ने से भी
निर्मल ही रहता है
कमल की यह खूबी है कि ताल तले
रहते हुए भी यह श्रेष्ठ कहलाता है।

अपनी खूबसूरती से मन मोहता है
कमल नैयनी को भी अपने
समीप खींच लाता है
कमल की बंद कली की भी
यह खूबी है कि
जीवन में आस जगाता है।

कमल पूजा की थाल में सजता है
तो कभी वारांगना के बालों में
जहां भी ये रहे, कमल तो निर्मल है।

कमल की यह खूबी है कि
ईश्वर के चरणों में भी
प्रतिदिन दिखता है।

गर्भनाल मैग्जिन से साभार